June 27, 2017




🗣 हम हकलाए मगर प्यार से 



"काले रंग कि टी-शर्ट में कुछ व्यक्ति २ लोगों से बात कर रहे हैं, शायद उनसे कुछ सवाल कर रहे|
एक के हाथ में कुछ पम्फ्लेट्स हैं! अब ये वहां से आगे बढ़ गए, अब ये लोग दूसरों से बात करने लगे| लेकिन इनकी टी-शर्ट पे  TISA लिखा है, ये क्या है, रुको टी-शर्ट कि बैक पे शायद इनका टैग लाइन लिखा है, हकलाओ मगर प्यार से |अब  ये क्या है ?"

शायद सहारा गंज मॉल के सिक्यूरिटी टीम ने कुछ ऐसा ही सोचा होगा कि उनकी ३ सिक्यूरिटी वाले हमारी तरफ आये| उन्होंने पुछा आप लोग क्या कर रहे? शायद उन्हें लग कि हम किसी नयी कंपनी के प्रोडक्ट के लिए मार्केटिंग कर रहे वो भी उनकी मॉल के अन्दर (ये सोचते ही मन में एक बड़ी ही सुखद अनुभूति हुई कि यहाँ हम लोगों से बात करने से कतराते और वो लोग समझ रहे हम किसी नए प्रोडक्ट कि सेल्स एंड मार्केटिंग टीम से हैं|)

खैर सिक्यूरिटी के हेड भी कुछ माजरा देख क आ गए, हमे इससे अच्छा मौका नहीं मिल सकता था अपनी स्ट्रेंजर टॉक का | भाई हम लखनऊ के सीधे साधे लोग हैं बिलकुल तनु वेड्स मनु के राजा अवस्थी जैसे, कम्युनिकेशन होना चाहिए, ईंट से ईंट जुड़नी चाहिए, अब चाहे अम्बुजा सीमेंट लगे या बिरला हमें कोई फर्क नहीं पड़ता| कम्युनिकेशन होना चाहिए बस! यही सोच के सिक्यूरिटी हेड को पूरे इत्मीनान से समझाया कि टीसा क्या है, हम क्या करते, क्यूँ करते |
उनको अपना कार्ड और पम्फलेट दे हम बहार आ गए , और बारी बारी से जो लोग किसी का वेट कर रहे थे उनसे बात करना प्रारंभ किया | हमने यहाँ कई लोगों से बात कि, कुछ विद्यार्थी थे कुछ नौकरी पेशा, कुछ का अपना बिज़नस था तो कुछ कारीगर| सभी कि बातों का अगर सार निकला जाये तो उनका यही मानना था कि इससे कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ता कि सामने वाला हकलाता है या नहीं, सभी को अपने काम से मतलब है, आज-कल किसी के पास इतना वक़्त ही नहीं कि कोई इसके बारे में सोचे. और साथ ही सभी इस बात पे भी एकमत दिखे कि हकलाने वाले व्यक्ति को अपनी हकलाहट को ले के परेशां नहीं होना चाहिए. एक सज्जन का फलों कि पैकिंग, ब्रांडिंग और सेल्लिंग का बिज़नस है उन्होंने एक कदम आगे बढ़ कर ये भी कहा कि आपको अगर कोई हतोत्साहित करे या मजाक भी उडाये तो आप उसको इगनोर करिए और 10 में से अगर 3 ही आपसे अच्छा बर्ताव करें तो भी आप सिर्फ उन्हीं पर फोकस करिए|






ये सब सुन के हम सभी काफी चकित भी थे और काफी अच्छा भी महसूस कर रहे थे| 

हालांकि ये निष्कर्ष तो कार्यशाला के पहले दिन कि ग्रुप डिस्कशन एक्टिविटी में ही निकल आया था| मैं खुद ये सुन कर आशचर्य कर रहा था कि हकलाहट कि वजह से तकलीफें तो हम सभी को हैं मगर सभी अलग अलग प्रकृति कि तकलीफों को ले के परेशान हैं और काफी हद्द तक अगर किसी एक को कोई समम्स्या है तो बिलकुल मुमकिन है कि दुसरे को उस परिस्थिति में बिलकुल भी समस्या न हो| 
जैसे किसी को व् स्वर के उच्चारण में समस्या थी तो दुसरे को क में| 



इस संचार कार्यशाला के 2 दिन कैसे निकल गए पता ही नहीं चला| और इस से हम सभी को बहुत सीखने को मिला| जब हम कोई काम समूह में करते हैं तो हमें इस बात का बहुत फायदा होता कि हम सभी एक-दुसरे के अनुभवों से ही अपनी आधी से ज्यादा समस्या हल कर सकते| और मैं सभी मित्रों का आभारी हूँ कि ज़बरदस्त गर्मी और बेहद प्रतिकूल मौसम में भी आप सभी ने कार्यशाला में उपस्थित होकर न केवल अपनीं बल्कि हम सभी कि मदद की | वरुण जी का हर समस्या को हँसते हँसते फेस करने कि कला हो या, परिणय जी कि कभी हार न मानने वाली हिम्मत| प्रमोद जी का हर टेकनीक्स पर जोर हो या आयुष कि सरलता से हर बार बोलना, राकेश जी कि वो मधुर और अत्यंत सौम्य आवाज़ (जिसके पीछे उनकी टेकनीक्स पे किया गया परिश्रम दिखता है|) हो या शैली जी का वो डेली प्रेजेंटेशन और ब्रीफिंग का एक्सपीरियंस| ये सब यही दर्शाता है कि हम सभी लोग अपने आप में ही काफी आद्वितीय हैं और यही हमें औरों से अलग बनाता है बोलेतो एकदम स्पेशल|

और सबसे आखिर में सबसे मज़े कि बात! हमारी वर्कशॉप के ही बीच लखनऊ यूथ हॉस्टल के प्रेसिडेंट रामपाल शर्मा जी हॉस्टल में राउंड पर आ गए| ईद के समय कोंसी कांफ्रेंस हो रही ये सोच के उन्होंने हमसे जानना चाहा कि आखिर हम क्या करते टीसा क्या है और जब हमने उन्हें बताया तो वो इतने प्रभावित हुए कि तुरंत अकाउंटेंट को बुलवा के हॉस्टल फी में INR-200 का डिस्काउंट दे दिया| साथ ही उन्होंने कहा कि लखनऊ बोहत बड़ा शहर है, यहाँ आप और बड़ा इवेंट कर सकते आप जैसे बहुत लोग मिल जायेंगे. उन्होंने खुद भी बताया कि यहाँ का एक रिसेप्शनिस्ट भी हकलाता है और वो काफी खुश थे कि टीसा ऐसा कार्य कर रहा| 

नोट- यदि आप या आपका कोई जानने वाला हकलाता है या टीसा कि इस मुहीम में भागीदार बनना चाहते हैं तो लखनऊ और आस-पास के छेत्र के लिए संपर्क करें: अतुल सिंह.  मो. 9565411271 -  atulbuddy.singh88@gmail.com

4 comments:

Satyendra Srivastava said...

Wah wah, dil khush ho gaya..
Magàr ye dil mange more ... Aisi hi workshops!

Atul Singh Sainger said...

बिलकुल सर, अब वाराणसी और इलाहाबाद का नंबर है...

Amitsingh Kushwah said...

बधाई हो इस सुंदर संचार कार्यशाला के लिए.

Jagdish Mewada said...

bahut badiya.... congratulations for successful work shop.